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देखभाल

डिमेंशिया वाले व्यक्ति से बात करने के सुझाव

अपडेट किया गया 6 मिनट में पढ़ेंGolden Moments टीम द्वारा · हम कैसे लिखते हैं

छोटा जवाब

किसी शांत जगह बात करें, व्यक्ति के सामने रहें, उनका नाम लें, और धीरे-धीरे, छोटे और सरल वाक्यों में बोलें। एक बार में एक ही सवाल पूछें, खुले सवालों की जगह दो विकल्प दें, और स्वाभाविक से ज़्यादा इंतज़ार करें। बहस न करें, टोकें नहीं, परखें नहीं। शब्दों के पीछे की भावना को जवाब दें, और जब बोलना मुश्किल होता जाए तो छूने, तस्वीरों और इशारों का सहारा लें।

  • बात शुरू करने से पहले पीछे का शोर कम करें और आँखें मिलाएँ।
  • छोटे वाक्य, एक बार में एक बात, और “वे” या “उन्होंने” के बजाय नाम का इस्तेमाल करें।
  • खुले सवालों के बजाय दो में से एक चुनने वाला, या हाँ-या-ना वाला सवाल पूछें।
  • जवाब का इंतज़ार करें। अगर बात समझ न आए, तो वही शब्द दोहराएँ, फिर नए शब्द आज़माएँ।
  • बहस या टोका-टाकी न करें। जो वे कह रहे हैं, उसके पीछे की भावना को जवाब दें।
  • जब शब्द धुँधले पड़ने लगें, तो छूने, लहजे, चेहरे के भाव और साझा तस्वीरों के ज़रिए बात करें।
इस पेज पर (8 हिस्से)
  1. डिमेंशिया वाले व्यक्ति से बात करने के सबसे ज़रूरी सुझाव क्या हैं?
  2. बातचीत कैसे शुरू करूँ?
  3. अपनी बात किस तरह कहूँ?
  4. अच्छे से कैसे सुनूँ?
  5. अगर वे कोई ऐसी बात कहें जो सच नहीं है तो?
  6. डिमेंशिया बढ़ने के साथ बातचीत कैसे बदलती है?
  7. क्या तस्वीरें और गतिविधियाँ बातचीत आसान कर सकती हैं?
  8. अगर मेरा धैर्य टूट जाए तो?

डिमेंशिया शब्द ढूँढना, लंबा वाक्य समझना, या पीछे के शोर को अनसुना करना मुश्किल बना सकता है। इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति ने जुड़ने की चाह छोड़ दी है। बातचीत की तैयारी, बोलने के ढंग और सुनने के तरीक़े में छोटे बदलाव आप दोनों के लिए बात को आसान और शांत बना सकते हैं।

डिमेंशिया वाले व्यक्ति से बात करने के सबसे ज़रूरी सुझाव क्या हैं?

उनका ध्यान पाएँ, बात सरल रखें, और धैर्य रखें। अगर आपको सिर्फ़ पाँच बातें याद रहें:

  1. कमरा शांत करें और उनके सामने रहें। टीवी बंद करें, उनकी नज़र की ऊँचाई पर बैठें, और उनका नाम लें।
  2. एक बार में एक ही बात कहें। छोटे वाक्य, एक विचार, एक सवाल।
  3. दो में से एक चुनने को कहें। “क्या आपको चाय पीनी है या कॉफ़ी?” “आपको क्या चाहिए?” से आसान है।
  4. इंतज़ार करें। जवाब के लिए स्वाभाविक से ज़्यादा समय दें, और बीच में न टोकने की कोशिश करें।
  5. कभी बहस न करें, न परखें। इस पर जवाब दें कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं, इस पर नहीं कि तथ्य सही हैं या नहीं।

बातचीत कैसे शुरू करूँ?

चीज़ें इस तरह रखें कि व्यक्ति आप पर ध्यान दे सके। Family Caregiver Alliance की गाइड सबसे पहले शोर कम करने की सलाह देती है: रेडियो या टीवी बंद करें, परदे या दरवाज़ा बंद करें, या किसी शांत जगह चले जाएँ।

  • सामने से जाएँ। पीछे या बग़ल से आने पर वे चौंक सकते हैं।
  • बताएँ कि आप कौन हैं। “नमस्ते पापा, मैं सीमा हूँ, आपकी बेटी।” इससे उन्हें आपका नाम खोजना नहीं पड़ता।
  • उनकी नज़र की ऊँचाई तक आएँ। अगर वे बैठे हैं, तो बैठ जाएँ या घुटनों के बल आएँ ताकि आँखें बराबर रहें।
  • अपने चेहरे और लहजे पर ध्यान दें। National Institute on Aging (NIA) सलाह देता है कि अपने लहजे, आवाज़ की ऊँचाई, चेहरे के भाव और हाव-भाव का ध्यान रखें, और गर्मजोशी भरा, सहज अंदाज़ रखें।
  • पक्का करें कि चश्मा और सुनने की मशीन लगी हों। जो बातचीत पूरी तरह दिखती या सुनाई न दे, उसे समझना मुश्किल होता है।

अपनी बात किस तरह कहूँ?

सरल शब्द, छोटे वाक्य और शांत, धीमी आवाज़ इस्तेमाल करें।

  • हर वाक्य में एक बात। “चलिए, आपका कोट पहन लें। फिर हम बाहर चलेंगे।” दोनों एक साँस में नहीं।
  • सर्वनाम नहीं, नाम इस्तेमाल करें। “जीजी का फ़ोन आया था” “उनका फ़ोन आया था” से साफ़ है।
  • आवाज़ नीची रखें, ऊँची नहीं। Family Caregiver Alliance आवाज़ ऊँची करने के बजाय नीची रखने की सलाह देता है।
  • दोहराएँ, फिर दूसरे शब्द आज़माएँ। अगर वे न समझें, तो वही शब्द एक बार दोहराएँ। उससे बात न बने, तो कुछ पल रुककर दूसरे शब्द आज़माएँ।
  • बताएँ भी, दिखाएँ भी। कप की ओर इशारा करें, दोनों स्वेटर उठाकर दिखाएँ, या पहला क़दम करके दिखाएँ।
  • उनसे बात करें, उनके बारे में नहीं। NIA चेताता है कि व्यक्ति के बारे में ऐसे बात न करें जैसे वे वहाँ नहीं हैं, और “बच्चों जैसी तुतली बोली” से भी बचें।

NIA आम सवालों के सरल रूप सुझाता है। इसी भावना के कुछ उदाहरण:

इसके बजाय यह आज़माएँ
“आप रात के खाने में क्या लेंगे?” “आप दाल-चावल लेंगे या रोटी-सब्ज़ी?”
“आप कैसा महसूस कर रहे हैं?” “क्या आपको थकान लग रही है?”
“क्या आपको भूख लगी है?” “खाना पाँच मिनट में तैयार हो जाएगा।”
“इसे ऐसे नहीं करते।” “चलिए, इसे ऐसे करके देखते हैं।”
“आपको झील की हमारी सैर याद है?” “मैं झील की हमारी सैर के बारे में सोच रही थी। बताइए, आपको उसमें क्या अच्छा लगा था।”
“मैंने आपको बताया तो था।” फिर से जवाब दें, प्यार से, जैसे पहली बार दे रहे हों।

अच्छे से कैसे सुनूँ?

मतलब और भावना को सुनें, सिर्फ़ शब्दों को नहीं।

  • इंतज़ार करें। चुप्पी अक्सर सोचने का समय होती है। बीच में बोलने से पहले धीरे-धीरे दस तक गिनें।
  • शब्द तभी सुझाएँ जब वे अटक जाएँ। Family Caregiver Alliance कहता है कि जब कोई जूझ रहा हो तो शब्द सुझाना ठीक है।
  • जाँच लें कि आपने क्या सुना। Alzheimer’s Association की बातचीत गाइड सुझाती है कि उनके शब्दों के पीछे का मतलब खोजें और उसे दोहराकर पक्का करें कि आपने ठीक समझा। “आपको गाड़ी की चिंता है?”
  • उनका चेहरा और शरीर देखें। NIA बताता है कि जब बोलना मुश्किल होता है, तो चेहरे के भाव उदासी, ग़ुस्सा या झुंझलाहट शब्दों से ज़्यादा साफ़ दिखा सकते हैं।
  • उनकी चिंताओं को गंभीरता से लें। भले ही कोई चिंता ग़लत तथ्य पर टिकी हो, भावना सच्ची है।

अगर वे कोई ऐसी बात कहें जो सच नहीं है तो?

बहस न करें। आपके जीतने की उम्मीद कम है, और व्यक्ति शर्मिंदा या डरा हुआ महसूस कर सकते हैं। इसके बजाय भावना से जुड़ें, फिर धीरे से आगे बढ़ें।

Family Caregiver Alliance सुझाता है कि ध्यान बँटाने से पहले भावना को स्वीकार करें। उदाहरण के लिए, अगर आपकी माँ ज़िद करें कि उन्हें बच्चों को स्कूल से लेने जाना है:

  • इसके बजाय: “माँ, आपके बच्चे बड़े हो गए हैं। वह चालीस साल पहले की बात थी।”
  • यह आज़माएँ: “आप हमेशा से कितनी परवाह करने वाली माँ रही हैं। मुझे बताइए, आप उन्हें लेने कैसे जाती थीं। पहले कुछ खा लें?”

Alzheimer’s Association भी सलाह देती है कि जिन बातों से आप सहमत नहीं हैं, उन पर बहस न करें। अपने पल चुनें: अगर कोई ग़लत मान्यता बेनुक़सान है, तो उसे रहने दें।

डिमेंशिया बढ़ने के साथ बातचीत कैसे बदलती है?

ज़रूरतें समय के साथ बदलती हैं, इसलिए अपना तरीक़ा बदलें। Alzheimer’s Association तीन मोटे चरण बताती है:

अवस्था क्या मदद करता है
शुरुआती यह न मान लें कि वे बात नहीं कर सकते। उन्हें बातचीत में शामिल करें, सीधे उनसे बात करें, पूछें कि वे कौन-सा सहारा चाहते हैं, और अगर काम आए तो हँसी-मज़ाक का इस्तेमाल करें।
बीच की शांत जगह में आमने-सामने की बातचीत। धीरे बोलें, आँखें मिलाए रखें, हाँ-या-ना वाले सवाल पूछें, निर्देश एक-एक कदम करके दें, और आलोचना या टोका-टाकी न करें।
बाद की सामने से जाएँ और बताएँ कि आप कौन हैं। इशारा करने और हाव-भाव को बढ़ावा दें। छूने, आवाज़ों, दृश्यों और गंधों का इस्तेमाल करें। उनके सामने कभी ऐसे बात न करें जैसे वे वहाँ नहीं हैं।

हर व्यक्ति अलग होता है, और एक ही व्यक्ति के अच्छे और कठिन दिन हो सकते हैं। वे इस समय कैसे हैं, इस पर जवाब दें, किसी लेबल पर नहीं।

क्या तस्वीरें और गतिविधियाँ बातचीत आसान कर सकती हैं?

हाँ। कोई साझा तस्वीर दबाव हटा देती है और आप दोनों को देखने और इशारा करने के लिए कुछ देती है।

  • तस्वीरों वाले सुझाव। बातचीत कार्ड तस्वीरों के साथ ऐसे खुले सवाल देते हैं जो कभी परखते नहीं।
  • पारिवारिक फ़ोटो। फ़ोटो के जोड़े आपकी चुनी फ़ोटो को एक कोमल मिलान वाले खेल में बदल देता है, जिससे अक्सर किस्से निकल आते हैं।
  • जानी-पहचानी कहावतें। कहावत पूरी करें मशहूर कहावतों का इस्तेमाल करता है, और उसके बाद बात करने का एक सुझाव आता है।
  • पृष्ठभूमि में मिलान वाले खेल। तस्वीरों के जोड़े आपके बात करते समय आपके हाथों को कुछ करने को देता है।

और जानकारी के लिए साथ मिलकर खेल कैसे खेलें और पुरानी यादों वाली गतिविधियाँ देखें। मुलाक़ातों और कॉल के लिए हमारी मिलने जाने और फ़ोन और वीडियो कॉल की गाइड पढ़ें।

अगर मेरा धैर्य टूट जाए तो?

यह सबके साथ होता है। NIA सुझाता है कि अगर आप झुंझला जाएँ, तो शांत होने के लिए कुछ समय लें। दूसरे कमरे में चले जाएँ, कुछ धीमी साँसें लें, और जब ठीक लगे तब लौट आएँ। आप बातचीत हमेशा दोबारा शुरू कर सकते हैं, और हो सकता है व्यक्ति आपके शांत मूड का जवाब दें। अगर झुंझलाहट लगातार बनती जा रही है, तो यह इस बात का संकेत है कि आपको और सहारा चाहिए, यह नहीं कि आप नाकाम हो रहे हैं। हमारी देखभाल करने वाले के अपने ख़याल की गाइड में मदद के कुछ ठिकाने हैं।

आम सवाल

डिमेंशिया वाले व्यक्ति से क्या नहीं कहना चाहिए?

सवाल पूछकर परखने (“आपको याद है…?”), टोकने (“यह ग़लत है”), खोई हुई चीज़ें याद दिलाने (“मैंने तो आपको बताया था”), और उनके सामने उनके बारे में ऐसे बात करने से बचें जैसे वे वहाँ हैं ही नहीं। बच्चों जैसी तुतली बोली से बचें। इनसे मदद के बिना शर्मिंदगी या परेशानी होती है।

जब वे तथ्य ग़लत बताएँ तो क्या मुझे उन्हें टोकना चाहिए?

आमतौर पर नहीं। अगर कोई ग़लत बात बेनुक़सान है, तो उसे जाने दें। बहस से शायद ही व्यक्ति की राय बदलती है, और अक्सर वे परेशान हो जाते हैं। इस पर ध्यान दें कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं और उन्हें अभी क्या चाहिए।

जब उन्हें शब्द न मिले तो क्या करूँ?

पहले उन्हें समय दें। अगर वे साफ़ तौर पर जूझ रहे हों, तो कोमलता से कोई शब्द सुझाना या अंदाज़ा लगाकर पूछ लेना ठीक है। उँगली से दिखाना, इशारे और तस्वीरें भी मदद कर सकती हैं।

डिमेंशिया की बाद की अवस्था वाले, जो कम ही बोलते हैं, उनसे बात कैसे करूँ?

सामने से जाएँ, बताएँ कि आप कौन हैं, और शांत आवाज़ और कोमल स्पर्श का इस्तेमाल करें। भावनाओं के लिए चेहरे और हाव-भाव देखें। आपकी मौजूदगी, कोई जाना-पहचाना गाना या हाथ थामना बिना शब्दों के बहुत कुछ कह सकते हैं।

स्रोत

यह पेज जिन संगठनों और अध्ययनों पर आधारित है, हम उनके लिंक देते हैं। पेज अपडेट करते समय हर स्रोत को जाँचा गया था।

  1. Communicating With Someone Who Has Alzheimer's Disease · National Institute on Aging
  2. Communication and Alzheimer's · Alzheimer's Association
  3. Caregiver's Guide to Understanding Dementia Behaviors · Family Caregiver Alliance

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