छोटा जवाब
पुरानी यादों की गतिविधियों का मतलब है फ़ोटो, चीज़ों, संगीत और किस्सों के ज़रिए साथ मिलकर बीते समय का आनंद लेना। यादों का एक डिब्बा बनाएँ, जीवन-कथा की एक सरल किताब तैयार करें, या साथ बैठकर फ़ोटो देखें। कभी परीक्षा न लें: “आपको याद है?” और “यह कौन है?” छोड़ दें, और “इसके बारे में बताइए” जैसे खुले न्योते दें। तथ्य सही होने से ज़्यादा ज़रूरी है एक प्यार भरी बातचीत।
- पुरानी यादों की बात एक बातचीत है, परीक्षा नहीं। सही होना मायने नहीं रखता; आनंद रखता है।
- “आपको याद है…?” और “यह कौन है?” की जगह टिप्पणियाँ और न्योते रखें, जैसे “इस दिन के बारे में बताइए।”
- व्यक्ति की ज़िंदगी से जुड़ी चीज़ों वाला यादों का डिब्बा हाथों और बातचीत, दोनों को थामने के लिए कुछ देता है।
- जीवन-कथा की किताब से परिवार, मिलने आने वाले और देखभाल करने वाले कर्मचारी व्यक्ति को जान पाते हैं, सिर्फ़ उनकी बीमारी को नहीं।
- अगर कोई याद दुख ले आए, तो पहले तसल्ली दें और धीरे से आगे बढ़ें।
इस पेज पर (7 हिस्से)
पुरानी यादों की गतिविधियों का मतलब बस इतना है कि साथ मिलकर बीते समय का आनंद लें। डिमेंशिया के साथ जी रहे बहुत-से लोगों को दशकों पुरानी बातें आज सुबह की बातों से ज़्यादा साफ़ याद रहती हैं। फ़ोटो, जानी-पहचानी चीज़ें, संगीत और किस्से उन यादों को खोल सकते हैं और आपको बाँटने के लिए कुछ प्यार भरा दे सकते हैं। बस एक नियम है: यह एक बातचीत है, कभी परीक्षा नहीं।
पुरानी यादों की बात क्या है, और यह सवाल-जवाब से कैसे अलग है?
यह फ़ोटो, चीज़ों, संगीत या वीडियो के ज़रिए यादें बाँटना है, व्यक्ति की अपनी रफ़्तार से। NHS इसे फ़ोटो, चीज़ों, वीडियो या संगीत की मदद से, किसी किताब में या टैबलेट पर, बीते अनुभव और किस्से बाँटना बताता है। सवाल-जवाब इससे अलग है: उसमें व्यक्ति से सही जवाब देने की उम्मीद की जाती है, और इससे आनंद की जगह शर्मिंदगी आ सकती है।
National Institute on Aging किसी व्यक्ति से यह पूछने को कि उन्हें कोई चीज़ या कोई व्यक्ति याद है या नहीं, उन बातों में गिनाता है जिनसे बचना चाहिए। Family Caregiver Alliance सुझाता है कि थोड़ी देर पहले की याद पर टिके सवालों से बचें, और उसकी जगह ज़्यादा पुराने समय की बात करें।
| इसके बजाय | यह आज़माएँ |
|---|---|
| “आपको यह याद है?” | “यह कोई खुशी का दिन लगता है। इसके बारे में बताइए।” |
| “यह कौन है?” | “यह रहीं सरला मौसी, समुद्र किनारे। वह टोपी तो देखिए।” |
| “यह कौन-सा साल था?” | “यह तो पुराना घर लगता है। वहाँ रहना कैसा लगता था?” |
| “नहीं, वह रमेश नहीं, सुरेश हैं।” | “बड़े मज़ेदार इंसान लगते हैं।” |
| “आप यह पहले ही बता चुके हैं।” | “मुझे यह किस्सा बहुत अच्छा लगता है।” |
बिना परीक्षा लिए फ़ोटो के बारे में बात कैसे करें?
जो दिख रहा है उससे शुरू करें, फिर व्यक्ति के लिए जगह छोड़ें कि वे चाहें तो कुछ जोड़ें।
- साथ-साथ बैठें। एल्बम दोनों के बीच पकड़ें ताकि आप साथ मिलकर देख रहे हों, मेज़ के उस पार से परीक्षा नहीं ले रहे हों।
- कुछ ही फ़ोटो चुनें। पूरे डिब्बे से बेहतर हैं पाँच अच्छी फ़ोटो। बड़े, साफ़ प्रिंट सबसे अच्छे रहते हैं।
- लोगों के नाम खुद बताएँ। “यह आप और पिताजी हैं, आपकी शादी के दिन” कहने से दबाव हट जाता है।
- बारीकियों पर टिप्पणी करें। कपड़े, गाड़ियाँ, खाना, मौसम, चेहरे। “क्या गाड़ी है। कितनी चमक रही है।”
- न्योता दें, माँग न करें। “… के बारे में बताइए” या “आपको इसमें क्या दिख रहा है?” चुप्पी भी ठीक है।
- उनके पीछे चलें। अगर वे बिल्कुल किसी और चीज़ की बात करने लगें, तो उसी के साथ चलें।
- अच्छा लगते-लगते ही रुक जाएँ। थकान आने से पहले एल्बम बंद कर दें।
तैयार तस्वीरों और सवालों के लिए बातचीत कार्ड आज़माएँ। परिवार की अपनी फ़ोटो को मिलान के एक सहज खेल में बदलने के लिए फ़ोटो के जोड़े आज़माएँ; आपकी चुनी हुई फ़ोटो आपके ब्राउज़र में ही रहती हैं।
यादों का डिब्बा कैसे बनाएँ?
यादों का डिब्बा व्यक्ति की ज़िंदगी से जुड़ी चीज़ों का एक डिब्बा है, जिन्हें हाथ में लेकर उनके बारे में बात की जा सके।
- एक मज़बूत डिब्बा चुनें जो खोलने में आसान हो, जैसे जूतों का डिब्बा, कोई पुराना टिन का बक्सा या लकड़ी का छोटा संदूक।
- कोई विषय या मिली-जुली चीज़ें चुनें। काम, कोई शौक, कोई जगह, कोई दशक, या हर चीज़ का थोड़ा-थोड़ा।
- सुरक्षित चीज़ें इकट्ठी करें। शुरुआत के लिए पाँच से दस चीज़ें काफ़ी हैं।
- कीमती चीज़ों की कॉपी इस्तेमाल करें। जिन फ़ोटो और कागज़ों की जगह कुछ और न ले सके, उनकी कॉपी बनाएँ और असली संभालकर रखें।
- एक बार में एक चीज़ निकालें। एक चीज़ हाथ में दें, उसके बारे में कुछ कहें, और देखें कि बात कहाँ जाती है।
रखने के लिए कुछ सुझाव:
- काम: नाम वाला बिल्ला, कोई छोटा औज़ार, वर्दी का कोई निशान, बही-खाता, नर्स का बैज, किसी ढाबे या होटल का मेन्यू कार्ड।
- घर: उनकी लिखावट में पकवान की विधि वाला कार्ड, रसोई का कपड़ा, पसंदीदा दुपट्टा, शॉल या टाई।
- शौक: काँटा हटाई हुई मछली पकड़ने की डोर, क्रिकेट की गेंद, ऊन का गोला, बीजों का पैकेट।
- जगहें: पोस्टकार्ड, नक्शे, किसी तीर्थ या घूमने की जगह की यादगार चीज़, अपने शहर के अख़बार की कोई कतरन।
- परिवार: फ़ोटो की कॉपी, किसी बच्चे की बनाई तस्वीर, शादी का कार्ड।
नुकीली चीज़ें, निगली जा सकने वाली छोटी चीज़ें, और ऐसी कोई भी चीज़ न रखें जो दर्द भरी यादें ला सकती हो, जब तक आपको पता न हो कि वह उन्हें अच्छी लगेगी।
जीवन-कथा की किताब कैसे बनाएँ?
जीवन-कथा की किताब फ़ोटो और छोटे-छोटे विवरणों का एक सरल एल्बम है, जो व्यक्ति की ज़िंदगी के बारे में हो। यह साथ में देखने की चीज़ है, और इससे मिलने आने वालों और देखभाल करने वाले कर्मचारियों को पूरा व्यक्ति दिखता है।
- एक रूप चुनें। शीट-कवर वाली फ़ाइल, प्रिंट की हुई फ़ोटो-किताब, या टैबलेट पर स्लाइडशो।
- कुछ हिस्सों की योजना बनाएँ। बचपन, स्कूल, काम, परिवार, जहाँ-जहाँ रहे, आस्था, शौक, पसंदीदा खाना और संगीत।
- हर पेज पर एक या दो फ़ोटो लगाएँ, बड़े अक्षरों में छोटे विवरण के साथ: “शारदा, उम्र 22, बैंक में नौकरी की शुरुआत।”
- पसंद और दिनचर्या भी लिखें। “चाय में कम चीनी लेती हैं। सुबह के भजन बहुत पसंद हैं। तेज़ आवाज़ वाला टीवी पसंद नहीं।” इससे उनकी देखभाल करने वाले किसी भी व्यक्ति को मदद मिलती है।
- व्यक्ति को शामिल करें, जितना वे चाहें: फ़ोटो चुनने, किस्से सुनाने, या बस किताब को बनते हुए देखने में।
- जोड़ते रहें। काम का होने के लिए इसका पूरा होना ज़रूरी नहीं।
पुरानी यादों के और सुझाव
- उनकी जवानी का संगीत चलाएँ और बात करें कि वह उन्हें कहाँ ले जाता है। देखें: संगीत वाली गतिविधियाँ।
- घर के वीडियो या टीवी कार्यक्रम देखें, उनके पसंदीदा दशकों के।
- बचपन का कोई पकवान बनाएँ और ख़ुशबू को बातचीत आगे बढ़ाने दें।
- उनके पुराने शहर या गाँव का नक्शा देखें और जानी-पहचानी गलियों पर उँगली फेरें।
- पुरानी पत्रिकाएँ या सूचीपत्र पलटें और दामों, पहनावे और गाड़ियों के बारे में बात करें।
- उनके किस्से रिकॉर्ड करें, फ़ोन पर, उनकी अनुमति से, परिवार के लिए।
- कॉल पर बाँटें। वीडियो कॉल के दौरान एक फ़ोटो दिखाएँ; देखें: फ़ोन और वीडियो कॉल।
- मिलने जाएँ तो कोई फ़ोटो या चीज़ साथ ले जाएँ। इससे मुलाक़ात को एक आसान केंद्र मिल जाता है; देखें: मिलने आना।
अगर कोई याद दर्द भरी हो तो?
कुछ यादें शोक, पछतावा या डर ले आती हैं। अगर व्यक्ति परेशान हो जाएँ, तो रुक जाएँ, उन्हें तसल्ली दें, और धीरे से बात या गतिविधि बदल दें। जो हुआ था उस पर बहस न करें। Family Caregiver Alliance सलाह देता है कि व्यक्ति को यह समझाने की कोशिश न करें कि वे ग़लत हैं, और उनकी दिखाई भावनाओं का जवाब दें, जो सच्ची होती हैं। अगर वे किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में बात करें जो अब नहीं रहा, जैसे वह अब भी ज़िंदा हो, तो भावना का जवाब दें: “आपको उनकी याद आती है। उनके बारे में बताइए।”
शोध क्या कहता है?
पुरानी यादों पर एक Cochrane समीक्षा में 22 परीक्षणों और 1,972 लोगों को शामिल किया गया, और पाया गया कि असर एक जैसे नहीं थे, छोटे थे, और जगह और तरीके के हिसाब से बदलते थे। उसमें डिमेंशिया वाले लोगों को नुक़सान का कोई सबूत नहीं मिला। हम पुरानी यादों की गतिविधियाँ इसलिए सुझाते हैं क्योंकि इनसे साथ का समय प्यार भरा और सार्थक बन सकता है, इलाज के रूप में नहीं। सहज बातचीत के बारे में और जानने के लिए देखें: बातचीत के सुझाव।
आम सवाल
डिमेंशिया वाले लोगों के लिए पुरानी यादों की गतिविधि क्या है?
इसमें यादें और बीते अनुभव बाँटे जाते हैं, अक्सर फ़ोटो, चीज़ों, संगीत या वीडियो की मदद से। यह आमने-सामने अकेले भी हो सकती है या किसी समूह में भी। मकसद एक अच्छी, सार्थक बातचीत है, यह परखना नहीं कि व्यक्ति को क्या याद है।
मुझे “आपको याद है?” क्यों नहीं पूछना चाहिए?
याददाश्त परखने वाले सवाल, जब जवाब न सूझे, तो व्यक्ति को शर्मिंदा या घबराया हुआ महसूस करा सकते हैं। National Institute on Aging किसी से यह पूछना कि उन्हें कोई चीज़ या कोई व्यक्ति याद है या नहीं, उन बातों में गिनाता है जिनसे बचना चाहिए। इसके बजाय जो दिख रहा है उस पर टिप्पणी करें, और व्यक्ति को जो चाहें जोड़ने दें।
यादों के डिब्बे में क्या रखें?
व्यक्ति की ज़िंदगी से जुड़ी सुरक्षित, मज़बूत चीज़ें चुनें: काम की चीज़ें, शौक का सामान, पसंदीदा दुपट्टा या शॉल, पोस्टकार्ड, पकवानों की विधि वाले कार्ड, खेल से जुड़ी यादगार चीज़ें या फ़ोटो की कॉपी। नुकीली चीज़ों, निगली जा सकने वाली छोटी चीज़ों, और ऐसी असली चीज़ों से बचें जिनकी जगह कुछ और न ले सके।
अगर वे तथ्य ग़लत बताएँ तो?
जाने दें। अगर आपकी माँ कहें कि फ़ोटो में उनकी बहन है, जबकि वह उनकी चचेरी बहन है, तो कोई बात नहीं। टोकने से एक प्यार भरा पल परीक्षा में बदल जाता है। जो किस्सा वे सुना रही हैं, उसी के साथ चलें और साथ में उसका आनंद लें।
स्रोत
यह पेज जिन संगठनों और अध्ययनों पर आधारित है, हम उनके लिंक देते हैं। पेज अपडेट करते समय हर स्रोत को जाँचा गया था।
- Infographic: Do's and Don'ts: Communicating With a Person Who Has Alzheimer's Disease · National Institute on Aging
- Reminiscence therapy for dementia · Cochrane
- Caregiver's Guide to Understanding Dementia Behaviors · Family Caregiver Alliance
- Activities for dementia · NHS